माता-पिता के लिए यह सुनना बहुत चिंता की बात हो सकती है कि उनके बच्चे के दिल में छेद है। लेकिन हर स्थिति गंभीर हो, ऐसा जरूरी नहीं है। बच्चों के दिल में छेद एक सामान्य बोलचाल का शब्द है, जिसका संबंध हृदय की दीवार में मौजूद असामान्य opening से हो सकता है।
इसे चिकित्सकीय रूप से Atrial Septal Defect (ASD), Ventricular Septal Defect (VSD) या अन्य congenital heart defects के रूप में पहचाना जा सकता है। कुछ छोटे defects समय के साथ अपने आप बंद हो सकते हैं, जबकि बड़े या जटिल defects के लिए उपचार की आवश्यकता पड़ सकती है।

छोटे बच्चों के दिल में छेद क्यों होता है?
अधिकांश मामलों में बच्चों के दिल में छेद जन्मजात होता है, यानी बच्चे के गर्भ में विकसित होने के दौरान हृदय की संरचना पूरी तरह सामान्य रूप से विकसित नहीं हो पाती। कई बच्चों में इसका कोई एक निश्चित कारण पता नहीं चलता। आनुवंशिक कारण और गर्भावस्था के दौरान कुछ स्वास्थ्य या पर्यावरणीय कारक जोखिम को प्रभावित कर सकते हैं।
उदाहरण के लिए, VSD में हृदय के निचले कक्षों के बीच की दीवार पूरी तरह विकसित नहीं होने के कारण opening रह सकती है। वहीं ASD में ऊपरी कक्षों के बीच की दीवार में opening बनी रह सकती है।
इसलिए माता-पिता को यह समझना चाहिए कि केवल किसी एक भोजन, सामान्य गतिविधि या छोटी-सी गलती को बच्चे के दिल में छेद का सीधा कारण मानना सही नहीं है।

बच्चे के दिल में छेद है, यह कैसे पहचाना जा सकता है?
बच्चों के दिल में छेद होने पर हर बच्चे में स्पष्ट लक्षण दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है। छोटे defect वाले कई बच्चे सामान्य दिख सकते हैं और उन्हें किसी विशेष परेशानी का अनुभव भी नहीं होता। कई बार डॉक्टर नियमित जांच के दौरान दिल की असामान्य आवाज यानी heart murmur सुनकर आगे की जांच की सलाह देते हैं।
कुछ बच्चों में निम्न संकेत दिखाई दे सकते हैं:
- दूध पीते समय जल्दी थकना
- बार-बार या तेज सांस लेना
- वजन ठीक से न बढ़ना
- जल्दी थक जाना
- बार-बार सांस से जुड़ी समस्या या संक्रमण
- होंठ या त्वचा का नीला दिखाई देना, विशेषकर कुछ गंभीर congenital heart defects में
हालांकि इन लक्षणों का मतलब हमेशा दिल में छेद होना नहीं होता। सही जानकारी के लिए डॉक्टर की जांच आवश्यक है। Echocardiography यानी Echo एक महत्वपूर्ण जांच है, जिससे हृदय की संरचना, defect का आकार और रक्त प्रवाह के बारे में जानकारी मिल सकती है।

दिल में छेद होने से कैसे बचा जा सकता है?
हर congenital heart defect को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है, क्योंकि कई मामलों में इसका सटीक कारण ज्ञात नहीं होता। फिर भी गर्भावस्था के दौरान नियमित medical check-up, डॉक्टर की सलाह का पालन और मां के स्वास्थ्य की उचित देखभाल महत्वपूर्ण है। कुछ maternal conditions, smoking और कुछ दवाओं जैसे कारकों का congenital heart defects के जोखिम से संबंध पाया गया है।
यदि परिवार में पहले से congenital heart disease का इतिहास है या pregnancy में किसी समस्या की आशंका हो, तो डॉक्टर उचित screening या fetal echocardiography की सलाह दे सकते हैं।

दिल में छेद का इलाज कैसे किया जाता है?
बच्चों के दिल में छेद का उपचार हर बच्चे में एक जैसा नहीं होता। उपचार का निर्णय defect के प्रकार, आकार, स्थान, बच्चे की उम्र, लक्षण और हृदय तथा फेफड़ों पर पड़ने वाले प्रभाव को देखकर किया जाता है।
यदि defect छोटा है और बच्चे को कोई समस्या नहीं हो रही है, तो डॉक्टर केवल नियमित monitoring की सलाह दे सकते हैं। कई छोटे VSD और कुछ ASD समय के साथ अपने आप बंद या छोटे हो सकते हैं।
यदि defect बड़ा है या उससे हृदय और फेफड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है, तो closure की आवश्यकता हो सकती है। कुछ defects को cardiac catheterization के माध्यम से device से बंद किया जा सकता है, जबकि कुछ स्थितियों में open-heart surgery की जरूरत पड़ सकती है।
Dr. Rakesh Jain, heart specialist in Indore, के अनुसार, ऐसे मामलों में माता-पिता को केवल “छेद कितना बड़ा है” पर ध्यान देने के बजाय यह समझना चाहिए कि वह हृदय के किस हिस्से में है और बच्चे के blood flow तथा overall heart function को कितना प्रभावित कर रहा है।
दिल के छेद को ठीक होने में कितना समय लगता है?
बच्चों के दिल में छेद को ठीक होने का समय हर बच्चे में अलग हो सकता है। यदि छोटा defect अपने आप बंद होना है, तो इसमें निश्चित समय बताना संभव नहीं होता। डॉक्टर समय-समय पर Echo और clinical examination के जरिए स्थिति की निगरानी करते हैं। कुछ defects बचपन में ही बंद हो सकते हैं, जबकि कुछ लंबे समय तक monitoring की जरूरत रखते हैं।
यदि catheter-based procedure या surgery की जरूरत पड़ती है, तो procedure के बाद recovery भी बच्चे की उम्र, defect और उपचार के प्रकार पर निर्भर करती है। इसलिए किसी एक निश्चित अवधि को सभी बच्चों पर लागू नहीं किया जा सकता।

दिल में छेद होने पर बच्चा कितने समय तक जीवित रह सकता है?
यह सवाल माता-पिता के लिए सबसे ज्यादा चिंता वाला होता है। इसका जवाब केवल “दिल में छेद है” सुनकर नहीं दिया जा सकता। छोटे और कम प्रभाव वाले defects वाले कई बच्चे सामान्य जीवन जी सकते हैं। VSD के सफल closure के बाद अधिकांश बच्चे स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। ASD के मामलों में भी उचित उपचार और follow-up के बाद long-term outlook अक्सर बहुत अच्छा होता है।
दूसरी ओर, बड़े या untreated defects हृदय और फेफड़ों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकते हैं और समय के साथ गंभीर complications का जोखिम बढ़ा सकते हैं। इसलिए diagnosis होने के बाद नियमित cardiology follow-up को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
माता-पिता के लिए जरूरी संदेश
बच्चों के दिल में छेद सुनकर घबराने के बजाय सबसे पहले सही diagnosis और defect की प्रकृति समझना जरूरी है। हर defect का इलाज surgery से ही हो, यह जरूरी नहीं है और हर छोटे defect को तुरंत बंद करना भी आवश्यक नहीं होता।
यदि बच्चे को दूध पीने में परेशानी, सांस फूलना, वजन न बढ़ना, जल्दी थकना या डॉक्टर द्वारा heart murmur बताया गया है, तो pediatric cardiologist या cardiologist से जांच कराना उचित है। समय पर पहचान और उचित follow-up से कई congenital heart defects को प्रभावी तरीके से manage किया जा सकता है।